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Monday, November 23, 2015

प्रतिभाताई पाटिल की जीवनी

पूरा नाम :- प्रतिभा देवीसिंह शेखावत.
जन्म :-  19 दिसम्बर 1934.
जन्मस्थान :-  नाडेगाव, जि .बोदवड, महाराष्ट्र.
पिता :-  नारायण राव पाटिल.
प्रतिभाताई पाटिल की जीवनी  / Pratibha Patil 
प्रतिभा देवीसिंह पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति / First Woman President Of India  तथा क्रमानुसार 12 वी राष्ट्रपति रह चुकी है. जब प्रतिभा पाटिल/ Pratibha Patil  राष्ट्रपति बनी थी तभी उन्होंने एक इतिहास रचा था. क्यू की भारत के सर्वोच्च पद पर रहने वाली वह पहली महिला थी. पेशे से वह एक वकील है, उन्होंने राजस्थान की राज्यपाल के रूप में भी सेवा की है. उनका जीवन यही तक सिमित नही है. अपने 28 साल के लम्बे राजनितिक जीवन में, वे बहोत से पदों पर कार्यरत रही. अपने 28 साल के करियर में वे शिक्षा मंत्री बनी, सामाजिक कार्य अधिकारी और इसी तरह के कई पदों पर विराजमान रही. लेकिन किसी भी पद पर रहते हुए उन्होंने हर बार अपनी काबिलियत को उस पद के बराबर साबित किया. राजनैतिक जीवन में अपने इसी गहरे अनुभवों के कारन ही उन्हें भारत के राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया. प्रतिभा ताई पाटिल को राजनिति में आने की प्रेरणा उनके पिता से मिली. अपने कठिन परिश्रम, लगा, चाह और कुछ करने की इच्छा से आज उन्होंने अपना नाम भारतीय इतिहास के सुनहरे पन्नो पर दर्ज कर दिया है, जिसे सदियों तक याद रखा जायेंगा. आइये अब हम उनके जीवन, करियर और उनकी उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जाने.
प्रतिभाताई पाटिल प्रारंभिक जीवन / Pratibha Patil Biography In Hindi
उनका जन्म महाराष्ट्र के जलगाव जिले के बोदवड तहसील के नाडेगाव में 19 दिसम्बर 1934 को हुआ था. उनके पिता नारायण राव स्थानिक राजनेता थे. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा आर.आर. विद्यालय, जलगाव से ग्रहण की और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से लॉ डिग्री प्राप्त की. उनके महाविद्यालयीन दिनों में, वे सक्रीय रूप से खेलो में भाग लेती थी. 1962 में उन्हें ऍम.जे. कॉलेज की कॉलेज क्वीनकी पदवी से नवाजा गया. 7 जुलाई 1965 को उन्होंने डॉ. देवीसिंह रामसिंह शेखावत से शादी कर ली, उन्हें दो बच्चे हुए. एक बेटा, राजेन्द्र सिंह और एक बेटी ज्योति राठौड.
प्रतिभाताई पाटिल करियर / Information About Pratibha Patil In Hindi
उन्होंने अपने करियर की शुरुवात जलगाव के जिला कोर्ट में शामिल होकर की. 27 साल की आयु में ही उन्हें महाराष्ट्र राज्य विधानमंडल के जलगाव निर्वाचन क्षेत्र में चुना गया. लगातार 4 तक वे मुक्ताई नगर निर्वाचन क्षेत्र से MLA नियुक्त की गयी. साथ ही वे महाराष्ट्र निर्वाचन क्षेत्र के कई पदों पर भी विराजमान थी. 1967 से 1972 तक, उन्होंने स्थानिक शिक्षामंत्री के रूप में सेवा की, और साथ कई सामाजिक कार्य भी करते रहे. उन्हें शिक्षा, स्वास्थ और ग्रामीण विकास से संबंधित कई कार्य किये. प्रतिभा ताई पाटिल महाराष्ट्र निर्वाचन क्षेत्र के नेता के रूप में काम करती थी. और इसके साथ ही वह राज्यसभा में व्यापारी सलाहकार समिति की अध्यक्ष भी थी. 8 नवम्बर 2004 को वह राजस्थान की राज्यपाल बनी और 2007 तक उस पद पे विराजमान रही. 25 जुलाई 2007 को, वह भारत के 12 वे राष्ट्रपति के रूप में विराजमान रही.
राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा पाटिल ने अपने प्रतिद्वंदी भैरोसिंह शेखावत / Bhairon Singh Shekhawat  को तीन लाख से ज्यादा मतों से हराया था. 1982 से 1985 तक वे फिर से वे महाराष्ट्र सरकार में शहरी विकास और आवास तथा 1985 में वे राज्यसभा पहोची और 1986 में राज्यसभा की उप-सभापति बनी. पाटिल प्रदेश कांग्रेस समिति, महाराष्ट्र की अध्यक्षा (1988-1990), राष्ट्रिय शहरी सहकारी बैंक संस्थाओ की निदेशक, भारतीय राष्ट्रिय सहकारी संघ की शासी परिषद की सदस्य रह चुकी है. और साथ ही वे राष्ट्रिय सामाजिक समाज कल्याण कांफ्रेंस में भी उपस्थित रह चुकी है. उन्हें वर्ष 1991 में दसवी लोक सभा (संसद का निचले सदन) के लिए निर्वाचित किया गया. उन्होंने 1985 में इंटरनेशनल कांफ्रेंस में शिष्टमंडल के सदस्य के रूप में बुल्गारिया में, महिलाओ की स्थिति पर ऑस्ट्रिया के सम्मलेन में शिष्टमंडल की अध्यक्ष के रूप में लंदन में और 1988 के दौरान आयोजित राष्ट्र्मंडलीय अधिकारी सम्मलेन में, चीन के बीजिंग शहर में विश्व महिला सम्मलेन में भाग लिया.
योगदान
भारत के विकास में उनका बहोत बड़ा सहयोग रहा है. और साथ ही महिला विकास, समाज कल्याण और बच्चो की शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने बहोत से विकास कार्य किये है. उनके विकास के लिए उन्होंने बहोत ही सार्वजानिक संस्थाओ का भी निर्माण किया. मुंबई और दिल्ली में महिलाओ के लिए उन्होंने हॉस्टल का निर्माण किया. और ग्रामीण विकास के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना भी की. उनके द्वारा निर्मित श्रम साधना संस्था ने भी उनकी सहायता से कई सामाजिक सारी किये और ग्रामीण क्षेत्र का विकास करने लगे. उन्होंने ग्रामीण और शहरी महिलाओ को बहोत सी सुविधाए प्रदान की. प्रतिभा ताई ने अपाहिज बच्चो के लिए जलगाव में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था का भी निर्माण किया. और साथ ही विमुक्त जाती, गरीब और इच्छुक बच्चो के लिए उन्होंने महाराष्ट्र के अमरावती जिले में उन्हें शिक्षा उपलब्ध करवाई. उन्होंने किसानो को उपर्युक्त खेती प्रशिक्षण देने के लिए कृषि विज्ञानं केंद्र की स्थापना अमरावती में की. महाराष्ट्र में महिलाओ के विकास में उनका सबसे बड़ा हाथ रहा है. उन्होंने गरीबो को आधुनिक शिक्षा उपलब्ध करवाई. और आज भी वे अपना ये काम सफल तरीके से कर रही है.
घटनाक्रम
1934 – महाराष्ट्र के नायगाव में जन्म लिया.
1962 – एम.जे. कॉलेज में कॉलेज क्वीनकी उपाधि दी गयी.
1965 – डॉ. देवीसिंह रामसिंह शेखावत से शादी की.
1967-72 – सहायक मंत्री के रूप में काम किया और साथ ही सामाजिक स्वास्थ, पर्यटन विभाग में भी कार्यरत रही. और भारत सरकार में विभिन्न पदों पर रही.
1972-74 – सामाजिक कल्याण की कैबिनेट मंत्री बनी.
1974-75 – सामाजिक स्वास्थ और कल्याण मंत्री बनी.
1975-76 – महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल की शराबबंदी, स्वास्थ और संस्कृति मंत्री बनी.
1977-78 – महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल की शिक्षा मंत्री बनी.
1979-1980 – CDP की विरोधी नेता बनी.
1982-83 – शहरी एवम ग्रामीण विकास मंत्री बनी.
1983-85 – मंत्रिमंडल की सिविल सप्लाइज (Civil Supplies) और सामाजिक कल्याण मंत्री बनी.
1986-88 – राज्यसभा की अध्यक्षा बनी और व्यापारी सलाहकार समिति, राज्यसभा की सदस्य बनी.
1988-90 – महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति (PCC) की अध्यक्षा बनी.
1991-96 – घरेलु समिति, लोकसभा की अध्यक्षा बनी.

2004-07 – राजस्थान की राज्यपाल बनी.


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A. P. J. Abdul Kalam

A. P. J. Abdul Kalam Biography In Hindi
पूरा नाम       – अबुल पकिर जैनुलाबदीन.
जन्म           – 15 अक्टूबर 1931.
जन्मस्थान  – रामेश्वरम, तमिलनाडु.
पिता            – जैनुलाबदीन.
माता            – अशींमा जैनुलाबदीन.

A. P. J. Abdul Kalam Biography In Hindi

अबुल पकिर जैनुलाबदीन (ए.पी.जे. अब्दुल कलाम) 2002 से 2007 तक भारत के राष्ट्रपति रह चुके है. उनका पेशा एक वैज्ञानिक से एक राजनेता के रूप में बदला, कलाम का जन्म रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ और वे वही बड़े भी हुए एवम भौतिक विज्ञानं और अन्तरिक्ष प्रोद्योगिकी अभियांत्रिकी में अपनी शिक्षा पूर्ण की. और उन्होंने अपने जीवन के 40 साल एक वैज्ञानिक और वैज्ञानिक प्रबंधक के रूप में Defence Research And Development Organisation (DRDO) और Indian Space Research Organisation (ISRO) में बिताये. और परिचित रूप से इंडियन सिविलियन स्पेस प्रोग्राम और मिलिट्री मिसाइल डेवलपमेंट में भी शामिल हुए. और Ofballistic मिसाइल और वाहन बनाने के तंत्रज्ञान में उनके सराहनीय कार्य करने हेतु उन्हें लोग भारत के “मिसाइल मैन” के नाम से भी जानते है. वे प्रधान संस्थाओ में भी शामिल है. और साथ ही तांत्रिक और राजनितिक रूप से 1998 के भारत के “पोखरण/नुक्लेअर” टेस्ट में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जो 1974 के बाद भारत का पहला नुक्लेअर टेस्ट था.
कलाम को सन 2002 में भारतीय जनता पार्टी और विरोधी भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के सहयोग से भारत का 11 व राष्ट्रपति चुना गया. जो अधिकतर “सामान्य लोगो के राष्ट्रपति” माने जाते थे, और कुछ बाद वे अपने सिविलियन जीवन और सामाजिक कार्यो में पूर्ण रूप से व्यस्त हो गये. वे कई सारे अवार्ड कर हकदार भी रह चुके है, उन्ही में से एक “भारत रत्न” भी उन्हें मिला.

A. P. J. Abdul Kalam In Hindi : जीवन और शिक्षण

अबुल पाकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 में एक तमिल मुस्लिम परिवार में तीर्थयात्रा के दौरान, पम्बन द्वीप पर रामेश्वरम में हुआ, जो पहले मद्रास में था और अब वह तमिलनाडु राज्य में है. उनके पिता एक नाव चालक और पास ही की स्थानिक मस्जिद के इमाम थे, उनकी माता अशींमा गृहिणी थी. उनके पिता ने एक नाव खरीद रखी थी जो रामेश्वरम आये हिंदु तीर्थयात्रियो को एक छोर से दुसरे छोर पर छोड़ते थे. कलाम अपने चार भाइयो में सबसे छोटे थे और उन्हें एक बहन भी थी. उनके पूर्वक जमींदार थे और बहोत आमिर भी थे उन्होंने उनके लिए बहोत सी जमीन छोड़ रखी थी. उनका मुख्य व्यवसाय श्री लंका से अनाज का व्यापार करना था और रामेशवरम आये तीर्थयात्रियो को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना था जैसे की रामेश्वरम से पम्बन. और परिणामतः उनके परिवार को एक नया शीर्षक मिला “Mara Kalam Iyakkivar (लकड़ी की नव से मार्ग दिखने वाले)”, और ये नाम कुछ साल बाद छोटा होकर “Marakier” बना. मुख्य जगह पर 1914 में पम्बन पुल के उदघाटन के साथ ही, उनके परिवार का व्यापार पूरी तरह से बंद हो गया और समय के साथ-साथ उन्होंने अपनी सारी जमीन भी खो दी थी, और अपने पुराने घर से भी अलग हो गये थे. और कलाम के बचपन में ही उनका परिवार गरीब हो गया था, और उनके परिवार की मदत करने के उद्देश से वे छोटी से उम्र में अखबार बाटने का काम करते थे.
उनके स्कूल के सालो में, कलाम को एक साधारण विद्यार्थी कहा गया लेकिन साथ ही उन्हें एक होनहार, होशियार और कड़ी महेनत करने वला विद्यार्थी, साथ ही सिखने की इच्छा रखने वाला विद्यार्थी कहा गया. वे घंटो तक पढाई करते, खास कर के गणित के विषयो की. और Schwartz Higher Secondary School, रामनाथपुरम से अपनी पढाई पूरी करने के बाद, कलाम तिरुचिराप्पल्ली के सैंट जोसफ कॉलेज, पढने के लिए गए.और फिर मद्रास यूनिवर्सिटी की शाखा से 1954 में वे भौतिक विज्ञानं से स्नातक हुए. और बाद में वे 1955 में मद्रास गये, जहा मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में अन्तरिक्ष प्रोद्योगिकी अभियांत्रिकी की पढाई की.जब कलाम किसी वरिष्ट कक्षा के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, वहा डीन उनकी प्रगति से नाखुश थे और उन्होंने कलाम को शिष्यवृत्ति रद्द करने की धमकी भी दी और 3 दिनों में सही तरह से प्रोजेक्ट बनाने कहा. उस समय कलाम अपनी अन्तिम्रेखा पर थे, लेकिन आखिर में उन्होंने डीन को खुश कर ही दिया और अंत में डीन ने कहा, “मैंने तुम्हे बहोत मुश्किलों और बाधाओ में दाल दिया था”. वे अपने सपने “लड़ाकू पायलट” बन ने से थोड़े से चुक गये, क्यू की वे परीक्षा में 9 वे आये थे और IAF (इंडियन एयर फ़ोर्स) में केवल 8 ही जगह खली थी.
मृत्यु  :
27 जुलाई 2015 को, कलाम “Creating A Livable Planet Earth” पर भाषण देने के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, शिलोंग गये. और तक़रीबन 6:35 P.M IST के आस-पास, उनके भाषण के 5 मिनट बाद ही, वे निचे गिरे. झा उन्हें जल्दी में इस अवस्था में पास ही के बेथानी हॉस्पिटल में ले जाया गया, जहा उनकी नाडी में कोई हलचल नहीं हो रही थी और जीवन के कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे थे. उन्हें अन्य जगह पर ले जाने से पूर्व ही ये तय हो चूका था की 7:45 P.M IST को अचानक हृदय विकार से उनकी मौत हो चुकी थी उनके अंतिम शब्द उनके सहायक श्रीजन पाल सिंह के लिए थे, जो खबरों के अनुसार : “मजाकिया व्यक्ति! क्या तुम अच्छा कर रहे हो?” थे.
30 जुलाई 2015 को, किसानो के राष्ट्रपति रामेश्वरम के पी करुम्बू मैदान पर पुरे विश्व के सम्मान के साथ मिटटी मं ओझल हो गये. उनकी अंतिम यात्रा में करीब 3,50,000 ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमे भारत के प्रधानमंत्री, तमिलनाडु के अध्यापक और कर्नाटक, केरला और आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री भी शामिल थे.

Thanks....

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Saturday, November 21, 2015

अक्षय कुमार का जीवन परिचय

पूरा नाम : – राजीव हरी ओम भाटिया
जन्म :- 9 सितम्बर 1967
जन्मस्थान : – अमृतसर, पंजाब.
पिता :- हरि ओम भाटिया
माता :- अरुणा भाटिया
विवाह :- ट्विंकल खन्ना

अक्षय कुमार का जीवन परिचय / Akshay Kumar Biography In Hindi

अक्षय कुमार/ Akshay Kumar  एक भारतीय बॉलीवुड फिल्म अभिनेता है, जिनका जन्म 9 सितम्बर 1967 को पंजाब के अमृतसर में हुआ है.
अक्षय कुमार का जन्म एक पंजाबी परिवार में राजीव हरी ओम के नाम से हुआ. उनके पिता एक सरकारी कर्मचारी थे. वे दिल्ली के चांदनी चौक में बड़े हुए. और बाद में वे मुंबई के कोलीवाडा गये. उन्होंने अपनी शिक्षा डॉन बोस्को स्कूल से ग्रहण की. उन्होंने अपनी महाविद्यालयीन शिक्षा गुरु नानक कॉलेज से ग्रहण की जहा जनपाल सिंह के साथ उन्होंने खेलो में भी हिस्सा लिया.
बाद में वे मार्शल आर्ट के अभ्यास के लिए बैंकाक गये और वही उन्होंने एक शेफ के रूप में भी काम किया. बाद में वे अपनी खुद की मार्शल आर्ट स्कूल शुरू करने के लिए वापिस मुंबई आये. उनका एक विद्यार्थी जो फोटोग्राफर था वह उन्हें एक मॉडल मानता था, और उनकी तस्वीरे लिया करता था. अक्षय को दो घंटो तक कैमरा के सामने पोज़ देने के लिए 5000 रुपये मिलते थे. इसीलिए उन्होंने मॉडल बनना पसंद किया. उनकी पहली फिल्म दीदार थी जो प्रमोद चकर्वर्ति के निर्देशन में बनी थी.

Akshay Kumar Family

ट्विंकल खन्ना के साथ 14 जनवरी 2001 को शादी कर ली. उन्हें आज एक लड़का और एक लड़की भी है, जिनका नाम आरव और नितरा है .
करियर
1991 की फिल्म सौगंध के साथ ही अक्षय कुमार ने बॉलीवुड में अपने अभिनय की शुरुवात की. फिर बाद में 1992 में उन्होंने एक सफल फिल्म खिलाडी में अभिनय किया. 1994 में उन्होंने अपनी पहली एक्शन फिल्म मै खिलाडी तू अनारी और फिर मोहरा में अभिनय किया, जो उस समय साल की सर्वश्रेष्ट फिल्म भी मानी गयी थी. बाद में उन्होंने यश चोपड़ा की फिल्म ‘यह दिल्लगी’ की जिसकी सफलता ने उन्हें फिल्म जगत में शिखर पर पहोचाया. और इसी फिल्म के लिए फिल्मफेयर में बेस्ट एक्टर के लिए उनके नाम को भी अभिसुचित किया गया था. बाद में इसी साल अक्षय ने दो सफल फिल्म सुहाग और एलान का निर्माण किया. और इसके लिए उन्हें उस साल का सबसे सफल एक्टर का ख़िताब दिया गया.
1995 में, उन्होंने एक हिट फिल्म सबसे बड़ा खिलाडी में अभिनव किया. खिलाडी सीरीज की हर फिल्म ने उन्हें बहोत बड़ी सफलता दिलाई.
बाद में 1996 में खिलाडी सीरीज की एक और फिल्म उन्होंने खिलाडियों का खिलाडी की जो फिर से साल की सबसे सफल और हिट फिल्म बनी.
1997 में, अक्षय ने दिल तो पागल है में सहायक कलाकार की भूमिका निभाई, जिसके लिए उनका नाम फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ट सह-कलाकार की सूचि में शामिल किया गया. और बाद में खिलाडी सीरीज की एक और फिल्म मिस्टर & मिसेस खिलाडी में उन्होंने हास्य-अभिनेता की भूमिका निभाई, जो उस समय बहोत असफल रही.
बाद में 1999 में, उन्होंने और दो फिल्म संघर्ष और जानवर की, जिसने उस समय ज्यादा कमी तो नही की लेकिन आलोचकों की नज़रो में सफल रही.
साल 2000 में, उन्होंने उनकी सबसे बड़ी हिट फिल्म हेरा फेरी में अभिनव किया. बाद में उन्होंने एक रोमांटिक फिल्म धड़कन की जो उस समय ज्यादा सफल नही रही.
फिर साल 2001 में, अक्षय कुमार ने पहली बार अजनबी फिल्म में विलेन (नेगेटिव किरदार) की भूमिका निभाई. उस फिल्म में उनके अभिनय के लिए बहोत तारीफ़ की गयी और इस लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट विलेन का अवार्ड भी दिया गया.
बाद में अक्षय कुछ ड्रामेटिक किरदार निभाने लगे. इस किरदार में वे 2001 की एक रिश्ता, 2002 की आँखे, 2005 की बेवफा और वक़्त और 2005 की द रेस में दिखे.
बाद में साल 2006 में, उन्होंने हेरा फेरी की सीरीज वाली फिर हेरा फेरी में अभिनय किया. फिर हेरा फेरी को बॉक्स-ऑफिस पर एक बड़ी सफलता मिली. उसी साल के अंत में, उन्होंने एक और हास्य-फिल्म भागम भाग की जिसे फिर बड़ी सफलता मिली.
फिर साल 2007 में, उन्होंने सफल फिल्में जैसे नमस्ते लंदन, हेय बेबी, भूल भुलैया, वेलकम की जिसे बॉक्स-ऑफिस पर कमाल की सफलता मिली. और तभी से उनकी फिल्मो को ब्लॉकबस्टर का शीर्षक दिया गया. क्यूकी एक ही साल में उन्होंने 5 सफल फिल्मे की थी.
बाद में अक्षय फिर अपनी नयी फिल्म सिंह इज किंग लेकर आये, जिसे दोबारा दर्शको का मनचाहा प्रतिसाद मिला. इसी साल अक्षय कुमार ने छोटी स्क्रीन पे आने का भी निर्णय किया और वे एक टी.व्ही खतरों के खिलाडी होस्ट करने लगे.
2010 के शुरू में ही उनकी फिल्म हाउसफुल आई जिसने पहले हफ्ते में ही बॉलीवुड में नए रिकार्ड्स बना लिए थे, और सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी.
अक्षय कुमार के फिल्में / Akshay Kumar Movie List
1994 – मै खिलाडी तु अनारी
1995 – सबसे बड़ा खिलाडी
1997 – मिस्टर & मिसेस खिलाडी
1999 – इंटरनेशनल खिलाडी
2000 – खिलाडी 420
2003 – अंदाज़
2005 – गरम मसाला
2007 – नमस्ते लंदन
2007 – वेलकम
2008 – सिंह इज किंग
2010 – हाउसफुल
2012 – रावडी राठोड
2012 – खिलाडी 786
2013 – वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई दोबारा
2014 – हॉलिडे
2014 – एंटरटेनमेंट
2015 – बेबी
2015 – गब्बर इज बैक
2015 – ब्रदर
2015 – सिंह इज ब्लिंग

Thanks...for read..


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मैरी कॉम की कहानी

Mary Kom
पूरा नाम – मंगटे चुंगनेइजंग मैरी कॉम
जन्म      – १ मार्च १९८३
जन्मस्थान – काङथेइ, मणिपुर, भारत
पिता  –  मंगटे टोनपा कोम
माता  – मंगटे अखम कोम
विवाह – के. ओलनेर
बच्चें  – 3 बच्चे (Mary Kom Kids)

मैरी कॉम की कहानी – Mary Kom Biography In Hindi

मंगटे चुंगनेइजंग मैरी कॉम जो ज्यादातर एम्.सी. मैरी कॉम और साधारणतः मैरी कॉम के नाम से जानी जाती है. वे भारत की सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर है. मैरी कॉम का जन्म पश्चिमी भारत के मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के काङथेइ ग्राम में हुआ. उनके माता-पिता मंगटे टोनपा कोम, झूम क्षेत्र में कार्यरत थे. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा लोकटक क्रिस्चियन मॉडल हाई स्कूल, मोइरंग में ग्रहण की और उच्च माध्यमिक शिक्षा सेंट सवीआर कैथोलिक स्कूल, मोइरंग से ग्रहण की. बादमे मैरी कॉम NIOS से ही अपनी परीक्षा देने लगी. जहा चुराचांदपुर कॉलेज से वह ग्रेजुएट हुई. बचपन से ही मैरी कॉम को एथलेटिक्स में दिलचस्पी थी और सन् 2000 में डिंगको सिंह ने उन्हें बॉक्सर बनने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने अपना प्रशिक्षण एम.नरजित से लेना शुरू किया, जो मणिपुर राज्य के बॉक्सिंग कोच थे.
मैरी कॉम पाँच बार विश्व बॉक्सिंग चैंपियन रह चुकी है और 6 विश्व चैंपियनशिप में हर एक में मैडल जितने वाली पहली महिला बॉक्सर है. वे “शानदार मैरी” के नाम से भी जाने जाते है, वे अकेली ऐसी भारतीय महिला बॉक्सर है जिन्हें समर 2012 के ओलिंपिक में चुनाव किया गया था, उन्होंने 51 kg की केटेगरी के अंदर अपने प्रतिस्पर्धी को हराकर ब्रोंज मैडल जीता. AIBA की विश्व महीला पहलवान की रैंकिंग में मैरी कॉम चौथे स्थान पर है. 2014 में इंचेओं, साउथ कोरिया के एशियाई खेलो में गोल्ड मैडल जितने वाली वे पहली भारतीय महिला बॉक्सर रही.

व्ययक्तिक जीवन – Mary Kom In Hindi

Mary Kom Family / मैरी कॉम  ने के. ओलनेर कोम से विवाह किया था और उन्हें 3 बच्चे भी हुए- एक का नाम के. खुपनेइवर और साथ ही दो जुड़वाँ भी थे. मैरी सन् 2001 में पहली बार अपने पती से मिली थी, उस समय मैरी लियेपुंजब और ओलनेर में हो रहे राष्ट्रिय खेलो की तयारी कर रही थी. और फिर 2005 में उन्होंने शादी कर ली.
मैरी कॉम ने देश में ही नही बल्कि विदेशो में भी कई रेकॉर्ड बनाये. और उन्होंने जल्द ही विश्व स्तर पर अपनी जित का परचम लहराया और भारत का नाम रोशन किया. वे एक महिला होने की वजह से कई बार उन्हें बुरी आलोचनाओ का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने इस और जराभी ध्यान ना देते हुए अपना पूरा ध्यान बॉक्सिंग में लगाया. और अंत में विश्वविजेता बनी.
Thanks..

history of Mahatma Gandhi

पूरा नाम    –  मोहनदास करमचंद गांधी.
जन्म         –   2 अक्तुंबर १८६९.
जन्मस्थान – पोरबंदर (गुजरात).
पिता         –    करमचंद.
माता        –   पूतळाबाई.
शिक्षा       –    १८८७ में मॅट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण. १८९१ में इग्लंड में बॅरिस्टर बनकर वो भारत लौट आये.
विवाह      –    कस्तूरबा ( Mahatma Gandhi Wife Name – Kasturba Gandhi )

Mahatma Gandhi In Hindi

आप उन्हें बापू कहो या महात्मा दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती हैं, अहिंसा और सत्याग्रह के संघर्ष से उन्होंने भारत को अंग्रेजो के स्वतंत्रता दिलाई, उनका ये काम पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया, वो हमेशा कहते थे बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो, और उनका मानना था की सच्चाई कभी नहीं हारती, इस महान इन्सान को भारत में राष्ट्रपिता घोषित कर दिया, उनका पूरा नाम ‘मोहनदास करमचंद गांधी‘ / Mahatma Gandhi इनका जन्म पोरबंदर इस शहर गुजरात राज्य में हुआ था, गांधीजीने ने शुरवात में काठियावाड़ में शिक्षा ली बाद में लंदन में विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद वह भारत में आकर अपनी वकालत की अभ्यास करने लगे, लेकिन सफल नहीं हुए. उसी समय दक्षिण अफ्रीका से उन्हें एक कंपनी में क़ानूनी सलाहकार के रूप में काम मिला, वहा महात्मा गांधीजी लगभग 20 साल तक रहे. वहा भारतीयों के मुलभुत अधिकारों के लिए लड़ते हुए कई बार जेल भी गए. अफ्रीका में उस समय बहुत ज्यादा नस्लवाद हो रहा था, उसके बारे में एक किसा भी है, जब गांधीजी अग्रेजों के स्पेशल कंपार्टमेंट में चढ़े उन्हें गाँधीजी को बहुत बेईजत कर के ढकेल दिया.
वहा उन्होंने सरकार विरूद्ध असहयोग आंदोलन संगठित किया. वे एक अमेरिकन लेखक हेनरी डेविड थोरो लेखो से और निबंधो से बेहद प्रभावित थे. आखिर उन्होंने अनेक विचारो ओर अनुभवों से सत्याग्रह का मार्ग चुना, जिस पर गाँधीजी पूरी जिंदगी चले, पहले विश्वयुद्ध के बाद भारत में ‘होम रुल’ का अभियान तेज हो गया, 1919 में रौलेट एक्ट पास करके ब्रिटिश संसद ने भारतीय उपनिवेश के अधिकारियों को कुछ आपातकालींन अधिकार दिये तो गांधीजीने लाखो लोगो के साथ सत्याग्रह आंदोलन किया, उसी समय एक और चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह क्रांतिकारी देश की स्वतंत्रता के लिए हिंसक आंदोलन कर रहे थे. लेकीन गांधीजी का अपने पूर्ण विश्वास अहिंसा के मार्ग पर चलने पर था. और वो पूरी जिंदगी अहिंसा का संदेश देते रेहे.

Mahatma Gandhi Biography In Hindi

एक नजर में Mahatma Gandhi Information/ महात्मा गांधीजी की जीवन कार्य :
१८९३ में उन्हें दादा अब्दुला इनका व्यापार कंपनी का मुकदमा चलाने के लिये दक्षिण आफ्रिका को जाना पड़ा. जब दक्षिण आफ्रिका में थे तब उन्हें भी अन्याय-अत्याचारों का सामना करना पड़ा. उनका प्रतिकार करने के लिये भारतीय लोगोंका संघटित करके उन्होंने १८९४ में ‘नेशनल इंडियन कॉग्रेस की स्थापना की.
१९०६ में वहा के शासन के आदेश के अनुसार पहचान पत्र साथ में रखना सक्त किया था. इसके अलावा रंग भेद नीती के विरोध में उन्होंने ब्रिटिश शासन विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन आरंभ किया.
१९१५ में Mahatma Gandhi / महात्मा गांधीजी भारत लौट आये और उन्होंने सबसे पहले साबरमती यहा सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की.
तथा १९१९ में उन्होंने ‘सविनय अवज्ञा’ आंदोलन में शुरु किया.
१९२० में असहयोग आंदोलन शुरु किया.
१९२० में लोकमान्य तिलक के मौत के बाद राष्ट्रिय सभा का नेवृत्त्व महात्मा गांधी के पास आया.
१९२० में के नागपूर के अधिवेशन में राष्ट्रिय सभा ने असहकार के देशव्यापी आंदोलन अनुमोदन देनेवाला संकल्प पारित किया. असहकार आंदोलन की सभी सूत्रे महात्मा गांधी पास दिये गये.
१९२४ में बेळगाव यहा राष्ट्रिय सभा के अधिवेशन का अध्यक्षपद.
१९३० में सविनय अवज्ञा आदोलन शुरु हुवा. नमक के उपर कर और नमक बनानेकी सरकार एकाधिकार रद्द की जाये. ऐसी व्हाइसरॉय से मांग की, व्हाइसरॉय ने उस मांग को नहीं माना तब गांधीजी ने नमक का कानून तोड़कर सत्याग्रह करने की ठान ली.
१९३१ में राष्ट्रिय सभे के प्रतिनिधि बनकर गांधीजी दूसरी गोलमेज परिषद को उपस्थित थे.
१९३२ में उन्होंने अखिल भारतीय हरिजन संघ की स्थापना की.
१९३३ में उन्होंने ‘हरिजन’ नाम का अखबार शुरु किया.
१९३४ में गांधीजीने वर्धा के पास ‘सेवाग्राम’ इस आश्रम की स्थापना की. हरिजन सेवा, ग्रामोद्योग, ग्रामसुधार, आदी विधायक कार्यक्रम करके उन्होंने प्रयास किया.
१९४२ में चले जाव आंदोलन शुरु उवा. ‘करेगे या मरेगे’ ये नया मंत्र गांधीजी ने लोगों को दिया.
व्दितीय विश्वयुध्द में महात्मा गांधीजी ने अपने देशवासियों से ब्रिटेन के लिये न लड़ने का आग्रह किया था, जिसके लिये उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. युध्द के उपरान्त उन्होंने पुन: स्वतंत्रता आदोलन की बागडोर संभाल ली. अंततः १९४७ में हमारे देश को स्वतंत्रता प्राप्त हो गई. गांधीजीने सदैव विभिन्न धर्मो के प्रति सहिष्णुता का संदेश दिया, १९४८ में नाथूराम गोडसे ने अपनी गोली से उनकी जीवन लीला समाप्त कर दी. इस दुर्घटना से सारा विश्व शोकमग्न हो गया था. वर्ष १९९९ में बी.बी.सी. व्दारा कराये गये सर्वेक्षण में गांधी जि को बीते मिलेनियम का सर्वश्रेष्ट पुरुष घोषित किया गया.
Mahatma Gandhi Book’s – महात्मा गांधी ग्रंथ  –  माय एक्सपेरिमेंट वुईथ ट्रुथ.
महात्मा गांधी विशेषता      –  भारत के राष्ट्रपिता,  महात्मा
Mahatma Gandhi Death – मृत्यु     –   30 जनवरी १९४८ में नथुराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या की.
मोहनदास करमचंद गांधी / Mahatma Gandhi भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के निदेशक थे. उन्ही की प्रेरणा से १९४७ में भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हो सकी. अपनी अदभुत आध्यात्मिक शक्ति से मानव जीवन के शाश्वत मूल्यों को उदभाषित करने वाले, विश्व इतिहास के महान तथा अमर नायक महात्मा गांधी आजीवन सत्य, अहिंसा और प्रेम का पथ प्रदर्शित करते रहे.

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“फर्श से अर्श तक” – Foodking Sarathbabu Success Story for u

Foodking Sarathbabu Success Story In Hindi

“फर्श से अर्श तक” – Foodking Sarathbabu Success Story In Hindi

हा ये कहावत उन लोगो के बारे मैं हैं, जो  सबसे ऊपर उठकर कुछ ऐसा कर गुजरते हैं जो न सिर्फ उनकी जिन्दगी बदल देते हैं बल्कि लाखों के लिए INSPIRATION बन जाते हैं. जो लोग सपने देखते हैं और अपने सपनों पे विश्वास रखकर उने पूरा करने के लिए पुरे जी जाना से प्रयास करते हैं , उन्हें कोई भी मुश्किल रोक नहीं सकती.
दोस्तों , आज मैं आपको ऐसे शख्स के बारे मैं बताऊंगा जिसने “फर्श से अर्श तक” का सफ़र तय किया…..
दुनिया उन्हें Foodking Sarathbabu के नाम से जानती है, शरथ बाबु नाम का चेन्नई शहर का लड़का जिसने अपने इच्छाशक्ति के जोर पे सभी मुश्किलों पर विजय प्राप्त करके, अपने सपने को साकार किया. बहूत गरीब घर मैं, चेन्नई के एक झोपड़ियों की बस्ती मैं जन्मे शरथ ने BITS PILANI से इंजीनियरिंग ओर IIM Ahmedabad से MBA पूरा किया, आज वे एक बड़े Businessman और Foodking Catering Services Pvt Ltd, कंपनी के मालक हैं. 2008 साल मैं उन्हें ‘पेप्सी यूथ आयकॉन’ (आदर्श युवक) पुरस्कार से सन्मानित किया.
शरथ का जन्म चेन्नई के माडीपक्कम मैं हुआ. उसे दो बड़ी बहने और दो छोटे भाई है. शरथ के माँ ने बहुत मेहनत कर के अपने पाच बच्चो को बढाया. उनके घर मैं वे अकेली ही कमाने वाली थी. शरथ की माँ सुबह ईडली बेचती थी, दोपहर सरकारी स्कुलो मैं बच्चों को खाना देने का कम करती थी. इतनी ख़राब हालत होकर भी शरथ ने कभी भी हार नहीं मानी.
इंजीनियरिंग के बाद शरथ ने 3 साल पोलारीस सॉफ्टवेयर कम्पनी मैं काम किया . पोलारीस मैं काम करके उन्होंने अपने परिवार के ऊपर के सारे कर्जे उतार दिये. और CAT की तयारी शुरू कर दी .जब पहली CAT परीक्षा हुई तो पेपर लिक होने के वजेह से उन्हें फिर से CAT की परीक्षा  देनी पड़ी जिसमे सरथ ने अच्छा Score किया और उन्हें IIM कॉलेज से इंटरव्यू को बुलाया गया.
एक बड़ी आईटी कम्पनी ने उन्हें 8 लाख year रुपये की salary की नोकरी का offer दिया पर उन्होंने उस नोकरी को ठुकराकर अपनी कटरिंग कम्पनी शुरू करने का जब फैसला लिया तो वो एक चर्चा का विषय बन गया, MBA के बाद शरथ ने  इडली बेचने का काम किया, जीस काम को उनकी माँ घर चलाने के लिए करती थी. लेकिन उन्होंने डटकर अपनी “फूडकिंग” नाम  की कॅटरींग कम्पनी पर अपना पूरा लक्ष्य केन्द्रीत किया और उसे ऊचाई पर ले गए.  जिसकी first unit opening Mr.Narayana Murthy, founder of INFOSYS के हाथो से हुई .
आज पुरे भारत में फूडकिंग की 500 से ज्यादा शाखायें हैं और फूडकिंग का TURNOVER करोडो का हैं, और सबसे बड़ी बात आज फूडकिंग के जरिये 50,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलता हैं.
कम उम्र मैं ही उन्होंने जो उचाई छू ली, जिसे देखकर सभी उनसे inspire होंगे.
चीटी की मुहं से खाना छिनकर खाने तक की गरीबी देखकर शरथबाबु ने जो कर दिखाया , सचमुच में  “फर्श से अर्श तक” का सफ़र हैं !

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history of मिस्टर ब्रायन ऐक्टन / Brian Acton जो आज whats app के co-founder है

history of मिस्टर ब्रायन ऐक्टन / Brian Acton जो आज whats app के co-founder है

Motivational Story In HindiMotivational Story In Hindi



आज कल सबके पास Android फोन है और उसमे एक ऐसा अप्लीकेशन है जिसके बिना हमारा फोन कुछ काम का नहीं होता उस अप्लीकेशन का नाम है – WhatsApp / व्हॉट्स अप.
क्या आपको पता है की what app की शुरुवात 2009 में हुई और आज की तारिख में उसके 60 करोड़ से ज्यादा users है. और आज कल लोगों के संपर्क का साधन बना हुवा है. तो आज हम जानते है की whats App की शुरुवात कैसी हुई और इसके पीछे का इतिहास / Whatsapp Story In Hindi.

Motivational Story In Hindi

मिस्टर ब्रायन ऐक्टन / Brian Acton जो आज whats app के co-founder है उन्होंने 2009 में जॉब के लिये Facebook में अप्लाई किया वो Facebook कंपनी में जॉब करना चाहते थे लेकीन उनको वहा से रिजेक्ट किया गया. बाद में उन्होंने व्टिटर पर भी जॉब के लिये कोशिश की लेकीन वहा भी उनके हाथ में निराशा ही आयी. जब किसी के साथ ऐसा बार – बार होता है तब उसे अपनी योग्यता पे, अपने Talent पे शक होने लगता है. बहोत से लोग अपनी जिंदगी से हार मान लेते है. परेशान होकर तनाव में आ जाते है.
लेकीन ब्रायन ऐक्टन को खुद पर विश्वास था. कुछ कर दिखाने की इच्छा थी. उनके अंदर खुद को साबीत करने की आग थी. उन्होंने दुसरे लोगों की तरह हार मानने की जगह, परेशान होने की जगह अपने दोस्त के साथ मिलकर रात-दिन मेहनत करके एक ऐसा अप्लीकेशन बना डाला जिसे पूरी दुनिया ने सर पर बिठा दिया.
व्हाट्सअप अप्लीकेशन बनाने के पहले जिस Facebook कंपनी ने WhatsApp अप्लीकेशन बनाने वाले ब्रायन ऐक्टन को रिजेक्ट किया था उसी को ठीक 5 साल बाद फेसबुक कंपनी ने ब्रायन ऐक्टन के WhatsApp अप्लीकेशन को 19 बिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपयों में एक लाख करोड़ से भी ज्यादा रुपयों में खरीदा. ब्रायन ऐक्टन जिस कंपनी में काम मांगने गये थे आज उसी कंपनी के मेजर शेयर होल्डर बन गये.
देखा दोस्तों, जिसे खुद पर विश्वास हो मेहनत करने की तैयारी हो उसे हर हाल में सफलता मिलती है. आप अपनी असफलता को किस तरह लेते है. इसपर आपकी सफलता निर्भर करती है. अगर हम अपनी असफलता को एक मौका समझकर आगे बढ़ने की उपयोग में लेते है तो आपको एक ना एक दिन सफलता जरुर मिलेंगी.
याद रखना की एक हार जिंदगी की हार नहीं होती और हमेशा ये कहते रहना की – I am चैम्पियन, I am champian.
All The Best.

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Sundar Pichai history

Sundar Pichai Inspirational Stories

Inspirational Stories In Hindi

गुगल को तो सब जानते ही है आज हम उसके CEO सुंदर पिचाई / Sundar Pichai के बारे में जानेंगे. वही सुंदर पिचाई जिसे गुगल ने अपने सभी फोर-फ्रंट फ्रेडक्ट का इंचार्ज बनाया था जिसमे Youtube को छोड़कर गुगल के सभी बड़े Product शामील थे. तब वो गुगल के co-founder लैरी पेज / Larry Page के बाद कंपनी में दुसरे नंबर के ताकद्वार अधिकारी बन गये थे. लेकिन वो यहाँ पर नहीं रुके उन्होंने कोशिश जारी रखी, वो इसलिये की उनका यह विश्वास था जल्द ही उनके काबिलियत को देखते हुये कभी भी उनकी नियुक्ती Google CEO के रूप में हो सकती है और आज उनकी वो कोशिश कामयाब रही आज वह दिन सबके सामने है. एक भारतीय व्यक्ती का यहाँ तक पहुचना निश्चित ही सभी भारतीयों के लिये गर्व की बात है. लेकिन यहाँ तक पहुचना इतना आसान नहीं था. तो आईये जाने की सुंदर पिचाई ने ये रास्ता कैसे पार किया.
सुंदर पिचाई का असली नाम सुंदराजन है. उनका जन्म 12 जुलाई 1972 को चेन्नई में हुआ. उनके पिता रघुनाथ पिचाई एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर थे. और वर्तमान में उनकी इलेक्ट्रिकल कॉम्पोनेंट की फैक्ट्री है.
सुंदराजन (सुंदर पिचाई) प्रारंभ से ही पढाई में होशियार थे. और उन्हें क्रिकेट में काफी रूचि थी इसलिये उनके माँ-बाप को अंदाजा हो गया की उनका बेटा उनका नाम रोशन करेंगा. लेकीन उन्होंने IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त करके स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से विज्ञान विषय में PHD कम्प्लीट की. लेकिन पिचाई को शुरू से M.B.A. करना था. इसलिये उन्होंने पेसिलवेनिया विश्वविद्यालय से M.B. A. की डिग्री प्राप्त की.
उन्हें गुगल ज्वाईन करने से पहले हायर स्टडी के लिये बहोत ऑफर मिले साथ ही कई बड़ी कम्पनियों के ऑफर भी आये जिसमे स्टेनफोर्ड में इंजिनियर, एप्लाइड में मॅनेजर, सिलिकॉन वैली में सेमीकंडक्टर मेकर लेकिन उन्होंने उन सभी ऑफर को ठुकरा दिया. शायद इसकी यही वजा होगी की वो जॉब करके अपने सपनों को छोड़ना नहीं चाहते थे.
पढ़ाई के बाद सन 2004 में सर्च टुलबार Search Toolbar के टीम के मेम्बर के रूप में गुगल ज्वाईन किया. पिचाई की कार्य करने की शैली से गुगल के अधिकारी बहुत प्रभावित हुए और उन्ही के सुझाव पर गुगल ने अपना खुद का ब्राउजर लाने का निर्णय लिया. और गुगल क्रोम ब्राउजर Chrome Browser) दुनिया के सामने आया. इस परियोजना में पिचाई ने महत्त्वपूर्ण रोल निभाया. उनके निर्देशन में ही गुगल क्रोम की शुरुवात हो सकी. इसके साथ ही 2013 में अपना उत्कृष्ट योगदान देकर गुगल की एंड्राएड Andraoid परियोजना की कमान संभाली.
पिचाई की योग्यता को देखते हुये गुगल के को-फाउंडर (co-founder) लैरी पेज ने उन्हें गुगल के सभी बड़े प्रोडक्ट का इंचार्ज बना दिया. जिसमे गुगल सर्च Google Search, गूगल मैप Google Map, गुगल +Google Plus, गूगल कॉमर्स Google Commerce, गूगल एजवरटाइजिंग Google Advertisement जैसे क्षेत्र शामील थे. पिचाई ने इन कार्यों को सफलतापुर्वक पुरे करके आज गुगल के CEO जैसे सर्वोच्च पद पर पहुंच गये है. और इसके साथ ही पिचाई भारत के उन लोगों में शामील हो गये है जो 400 अरब डॉलर कारोबार करने वाली अंतराष्ट्रीय कम्पनियों के शिर्ष अधिकारी है. जिसमे सत्य नडेला / Atya Nadella, मास्टर्ड कार्ड के अजय बंगा / Ajay Banga जैसे अनेक नाम पहले से शामील है.
निश्चित ही आज सुंदर पिचाई भारत वासियों के लिये एक रोल मॉडल है और ये आने वाले दिनों में युवाओं के लिए वो प्रेरणा का काम करते रहेंगे.
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महापुरुषों की विफलता से सक्सेस की कहानी

महापुरुषों की विफलता से सक्सेस की कहानी

जीवन में या किसी भी व्यवसाय में सफलता प्राप्त करने के लिए लगातार सकारात्मक रहना बहोत आवश्यक है. अपने आप को उस क्षेत्र में ले जाए जहा बहोत ज्यादा कचरा (मुश्किलें) हो, और जहा आपकी इच्छा अनुसार कुछ नहीं हो रहा हो. इसलिए, जब-जब भी मै निराश होता हु तो मुझे इन महापुरुषों की असफलता याद आती है.. तो आइये देखते है इन 9 महान लोंगो की विफलता की कहानी शोर्ट में / Great Men Failure Stories In Hindi और उनकी बाद की Success Story तो आपको पता ही है.

Failure Stories In Hindi / महापुरुषों की विफलता से सक्सेस की कहानी

1. बिल गेट्स / Bill Gates
माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और अध्यक्ष, ने पूरी तरह से 21 वी सदी में कंप्यूटर को काम में लाकर काम करने की पूरी संस्कृति ही बदल डाली. वे एक दशक से भी ज्यादा दुनिया के सबसे अमिर व्यक्ति रह चुके है. 1970 के पहले अपना Business शुरू करने से पूर्व उन्हें हॉवर्ड विश्वविद्यालय से निकाला गया था. और सबसे ज्यादा मजेदार बात ये है की, उन्होंने अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी (जो बाद में माइक्रोसॉफ्ट बनी) सॉफ्टवेयर तंत्रज्ञान को 50 US $(डॉलर) में ख़रीदा था.

2. अब्राहम लिंकन  / Abraham Lincoln
ने अपने पुरे जीवनकाल में 5 साल से ज्यादा पढाई नही की. और जब वे बड़े हुए, तो वे राजनीती में शामिल हुए और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के 16 वे राष्ट्रपति बनने से पूर्व 12 बार असफल हुए.

3. इस्साक न्यूटन / Isaac Newton
उनके काल के बहोत बड़े अंग्रेजी गणित के जानकार थे. उनके प्रकाश विज्ञान और गुरुत्वाकर्षण के आविष्कार ने उन्हें दुनियाभर में पह्छां दिलाई और महान वैज्ञानिक भी बनाया. ऐसे कई विचार है की इस्साक बचपन से ही होशियार थे, लेकिन ऐसा नहीं है. वे अपनी स्कूल की श्रेणी में बहोत ही अस्वस्थ थे और उनके शिक्षक उन्हें बेवकूफ समझते थे.

4. थॉमस एडिसन / Thomas Edison
ने बहोत सारे यंत्रो को विकसित किया जिनका 20 वी सदी के जीवन पर बहोत प्रभाव पड़ा. एडिसन को इतिहास का बहुफलदायक अविष्कारक कहा जाता है, जिनके नाम आविष्कार करने के 1093 U.S अधिकार थे. जब वे बच्चे थे तब उनके शिक्षक ने उनसे कहा था की वे कुछ भी सिखने के लोए बहोत ही बुद्धू है. और जब वे बड़े हुए, तब एक सफल लाइट बल्ब बनाने से पूर्व उन्होंने 9000 से भी ज्यादा प्रयोग किये.

5. वाल्टर डिज्नी / Walt Disney
एक अमेरिकन सिनेमा के निर्माता, निर्देशक, सिनेमा लेखक, आवाज़ कर्ता और कार्टून फिल्म बन्ने वाले दिग्दर्शक थे. उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी इशारा देने वाले चित्र बनाने की सबसे बड़ी कंपनी डिज्नी की स्थापना की. उसकी संस्था आज वाल्ट डिज्नी कंपनी के नाम से जानी जाती है, जो साल में 30 बिलियन $ का राजस्व बनती है. डिज्नी ने अपना पहला Business खुद के ही घर में शुरू किया और उनका निर्माण किया पहला कार्टून असफल भी हुआ. उनके पहले पत्रकार सम्मलेन में, एक अखबार के संपादक ने उनका उपहास भी किया क्यों की उनके पास एक अच्छी सिनेमा बनाने की कल्पना नहीं थी.

6. विंस्टन चर्चिल / Winston Churchill
6 वी कक्षा Fail थे. लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम करना कभी नहीं छोड़ा. वो प्रयत्न करते रहे और दुसरे विश्व युद्ध के दौरान यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बने. चर्चिल साधारणतः ब्रिटेन और दुनिया के इतिहास में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण नेता थे. BBC के 2002 के चुनाव में जिसमे 100 महानतम ब्रिटिश लोगो का चुनाव होना था उसमे सभी ने चर्चिल को सबसे ज्यादा महत्त्व दिया गया.

7. अल्बर्ट आइंस्टीन / Albert Einstein
एक सैधान्तिक भौतिकशास्त्री थे जिन्हें 20 वी सदी में सबसे ज्यादा महत्त्व दिया जाता था. 1921 में उन्हें Photo electronic प्रभाव के स्पष्टीकरण के लिए और सैधान्तिक भौतिक विज्ञानं में उनकी सेवा के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. जबकि, जब आइंस्टीन जवान थे, उसके माता-पिता समझते थे की वे दिमाग से कमजोर है. उसके स्कूल के ग्रेड भी बहोत कम थे इसलिए उनके शिक्षक उन्हें स्कूल छोड़ देने के लिए कहते थे और कहते थे की, “ तुम कभी किसी भी कीमत पर कुछ नहीं कर सकते”.

8. हेनरी फोर्ड / Henry Ford
की पहली दो मोटर गाडी की कंपनी असफल हुई. लेकिन उन्होंने कंपनी स्थापित करना नहीं छोड़ा और उनकी फोर्ड मोटर कंपनी पहली सबसे प्रचलित और वहन करने योग्य कीमत पर कार बनाने वाली कंपनी बनी. कंपनी सिर्फ यूनाइटेड स्टेट और यूरोप में ही नहीं बल्कि 20 वी सदी में उनकी कंपनी आर्थिक क्षेत्र और समाज में भी प्रचलित हो गयी थी. उनके अधिकांश उत्पादन, ज्यादा मजदूरी और कम कीमत ने प्रबंधक स्कूल की शुरुवात की जिसे “Fordism” कहा जाता है. उनके समय में वो दुनिया के 3 सबसे ज्यादा अमिर व्यक्तियों में से एक थे.

9. सोइचिरो हौंडा / Soichiro Honda
को दुसरे विश्व युद्ध के दौरान Toyoto Motor Corporation ने साक्षात्कार (Interview) में असफलता मिली थी. वो तब तक “Jobless” थे जब तक उनके पडोसी ने उनकी घर पे बनाई स्कूटर नहीं खरीदी. परिणामतः उन्होंने खुद के ही घर में खुद का ही Business/Company शुरू किया/की. जिसका नाम HONDA है. आज यह दुनिया की सबसे ज्यादा वाहन निर्माण करने वाली सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में से एक है, और अपने उत्पादन से GM और क्रिसलर को पराजित किया. आज पुरे विश्व में 437 जगहों पर इनका प्रसार है, और हौंडा एक विकसित वाहन का निर्माण करने वाली कंपनी है. हौंडा ने वाहन के साथ–साथ छोटे-छोटे कलपुर्जो, engines और Sport-Car का भी उत्पादन किया है.


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Kasturba Gandhi history




पूरा नाम    –  कस्तूरबा मोहनदास गाँधी
जन्म         –  11 अप्रैल 1869
जन्मस्थान – पोरबंदर
पिता         –   गोकुलदास कपाडिया
माता        –   व्रजकुवर कपाडिया
विवाह      –   मोहनदास करमचंद गाँधी

Kasturba Gandhi In Hindi

कस्तूरबा मोहनदास गाँधी, महात्मा गाँधी की पत्नी (Mahatma Gandhi Wife) उनके पति की संस्था के साथ वो भी एक राजनितिक कार्यकर्त्ता और नागरिक हक्क के लिए लड़ने वाली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थी.

प्रारंभिक जीवन – Kasturba Gandhi Biography In Hindi

पोरबंदर के गोकुलदास और व्रजकुवर कपाडिया की पुत्री के रूप में का कस्तूरबा का जन्म हुआ. 1883 में 14 साल की कस्तूरबा का विवाह, सामाजिक परम्पराओ के अनुसार 13 साल के मोहनदास करमचंद गाँधी के करवा दिया गया. उनके शादी के दिन को याद करते हुए, उनके पति कहते है की, “हम उस समय विवाह के बारे में कुछ नहीं जाते थे, हमारे लिए उसका मतलब केवल नए कपडे पहनना, मीठे पकवान खाना और रिश्तेदारों के साथ खेलना था”. क्यू की, यह एक प्रचलित परंपरा थी, ताकि किशोर दुल्हन ज्यादा से ज्यादा समय अपने माता पिता के साथ बिता सके और अपने पति से दूर रह सके. मोहनदास का कहना था की शादी के बाद वे कस्तूरबा से प्रेम करने लगे थे और वे स्कूल में भी उन्ही के बारे में सोचते थे उनसे मिलने की योजनाये बनाते रहते थे. वे कहते थे की कस्तूरबा की बाते और यादे अक्सर उनका शिकार कर जाती.
जब गांधीजी ने लन्दन में 1888 में अपनी पढाई छोड़ डी, तब कस्तूरबा महात्मा गांधी जी के साथ रहने लगी और एक शिशु को भी जन्म दिया जिसका नाम हरिलाल गाँधी था. कस्तूरबा को 3 और बच्चे थे, मणिलाल गाँधी, रामदास गाँधी और देवदास गाँधी.

कस्तूरबा गाँधी का राजनितिक जीवन :

Kasturba Gandhi / कस्तूरबा गाँधी उनके पति के साथ काम करके, कस्तूरबा एक सामाजिक कार्यकर्त्ता और स्वतंत्रता सेनानी बन गयी थी. गांधीजी के लॉ की पढाई हेतु दक्षिण अफ्रीका जाने के बाद, उन्होंने भी अपने पति के साथ 1897 में दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की. 1904 से 1914 तक, दुर्बन में वह फ़ीनिक्स सेटलमेंट में एक्टिव रही. 1913 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय कामगारों का साथ दिया, इसके बाद कस्तूरबा को 3 महीने के लिए मजदूरो की जेल में भी जाना पड़ा. बाद में भारत में, कभी जब महात्मा गाँधी को जेल हो जाती तब कुछ समय के लिए कस्तूरबा उनके अभियान को आगे बढाती. 1915 में, जब गांधीजी भारतीय बागानों को मदत करने वापिस आये तब कस्तूरबा ने उनका साथ दिया. उन्होंने स्वास्थ विज्ञानं, अनुशासन, पढना और लिखना सिखाया.
कस्तूरबा गाँधी की मृत्यु – Kasturba Gandhi Death
कस्तूरबा गाँधी के जन्म में उलझन के कारन दीर्घकालीन फेफड़ो की बीमारी से पीड़ित थी. उनके फेफड़े न्युमोनिया की बीमारी से पीड़ित थे.
जनवरी 1944 में, कस्तूरबा को 2 हृदय विकार आये जिन्होंने उनकी सेहत को बहोत ख़राब किया. जहा इलाज के बावजूद उनके दर्द में कोई कमी नहीं हुई. सास लेने में तकलीफ होने के कारन उन्हें रात में नींद नहीं आती थी. परिवार की सेवा की चाह से उन्होंने अपने इलाज के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ली. काफी दिनों के बाद सरकार ने उन्हें ठीक करने के लिए विशेष डॉक्टर को उनके इलाज के लिए आमंत्रित किया, जिसने उनका इलाज किया. शुरुवात में उन्होंने उत्तर तो दिया, और दुसरे हफ्ते के अंत तक उनकी तबियत में सुधार भी हो रहा था और वे व्हील चेयर पर बैठकर लोगो से बाते भी करने लगी लेकिन कुछ समय बाद उन्हें उस बीमारी ने फिर से घेर लिया.
कई लोग उन्हें ये कहते थे की, “वे जल्द ही इस बीमारी से ठीक हो जायेंगे” लेकिन प्रति उत्तर में वे कहती थी की,” नहीं, अब मेरा समय आ गया है”.
कस्तूरबा वह महिला थी जिसने जीवन भर अपने पति का साथ दिया. जबकि स्वतंत्रता के दिनों में महिलाओ को इतना महत्त्व नहीं दिया जाता था, उस समय महात्मा गांधीजी ने कभी कस्तूरबा को समाजसेवा करने से नहीं रोका. कमउम्र में शादी होने के बाद भी कस्तूरबा अपनी जवाबदारियो से नहीं भागी, वो अंत तक अपने कर्तव्यो का पालन करती रही, और अपने समाज की सेवा करती रही.
निच्छित ही कस्तूरबा आज के महिलाओ की प्रेरणास्त्रोत है.

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Mahadevi Verma history







पूरा नाम – महादेवी स्वरूप नारायण वर्मा
जन्म – 26 मार्च 1907
जन्मस्थान – फ़र्रुख़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
पिता – श्री गोविंद प्रसाद वर्मा
माता – हेमरानी देवी
विवाह – श्री स्वरूप नारायण वर्मा

Mahadevi Verma In Hindi

महादेवी वर्मा/ Mahadevi Verma हिंदी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवियित्रियो में से एक थी और स्वतंत्रता सेनानी भी थी. महादेवी वर्मा जी हिंदी साहित्य में 1914 से 1938 तक छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती है. आधुनिक हिंदी की सबसे सशक्त कवियित्रियो में से एक होने के कारण उन्हें “आधुनिक मीराबाई ” के नाम से भी जाना जाता है. समय के साथ, उनके सिमित लेकिन अप्रतिम गद्य को एकमात्र हिंदी साहित्य माना जाता है. वे हिंदी कवी सम्मलेन की प्रमुख कवियित्री थी.
वो प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्राचार्य और फिर उप-कुलाधिपति रह चुकी है, जो अहमदाबाद में महिलाओ का निवासी महाविद्यालय है. उनके जीवन भर की उपलब्धियों जैसे साहित्य अकादमी अनुदान 1979 में, और 1982 के जनानपीठ पुरस्कार को देखते हुए उन्हें भारत का सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार दिया गया. उन्हें 1956 में पदम् भूषण और 1988 में पदम् विभूषण से सम्मानित किया गया, जो भारत का तीसरा और नागरिकत्व का दूसरा सबसे बड़ा सम्मान है.

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय / Mahadevi Verma Biography In Hindi

महादेवी वर्मा का जन्म फरुखाबाद में हुआ था. उनकी शिक्षा जबलपुर, मध्य प्रदेश से हुई. वो गोविन्द प्रसाद वर्मा और हेम्मा रानी की सबसे बड़ी बच्ची थी. उनकी बचपन में डॉ.स्वरुप नारायण वर्मा, से शादी कर दी गयी. महादेवी जी उनके माता पिता के साथ रहती थी, जबकि उनके पति लखनऊ से अपनी पढाई पूरी कर रहे थे, इसी समय महादेवी ने अपना उच्च शिक्षण अल्लाहाबाद यूनिवर्सिटी से B.A की परीक्षा 1929 में पूरी कर उनकी मास्टर डिग्री 1933 M.A संस्कृत में की.
1966 में उनके पति की मृत्यु पश्यात, वो हमेशा के लिए अल्लाहाबाद चली गयी और उनकी मृत्यु तक वही रही.
महादेवी को अल्लाहाबाद(प्रयाग) महिला विद्यापीठ की प्रथम प्रधानाध्यापिका नियुक्त किया गया, उन्होंने ये सब इस उद्देश से शुरू किया की वे लडकियों को हिंदी भाषा में भारत का ज्ञान और परम्पराओ को पढ़ा सके और उन्हें सुशिक्षित बना सके. बाद में वे विद्यापीठ(संस्था) की कुलाधिपति बनी.
महादेवी वर्मा का प्रारंभिक जीवन / Mahadevi Verma Early Life In Hindi :
मेरे बचपन के दिन”, उन्होंने उस समय ये किताब लिखी थी जब वे लोग बेटियों को परिवार का बोझ समझते थे, वो अपने आप को किस्मत वाली समझती थी की वो पढ़े लिखे परिवार में जन्मी. उन्होंने Crosthwaite Girls College, अहमदाबाद में एडमिशन लिया. महादेवी जी के अनुसार, उन्होंने एकता की ताकत को Crosthwaite के हॉस्टल में सिखा था, जहा सभी धर्मो के विद्यार्थी एक साथ एक ही जगह पर रहते थे. महादेवी जी ने गुप्त रूप से कविताये लिखना शुरू किया. लेकिन गुप्त रूप से उनकी रूम-मेट और सीनियर सुभद्रा कुमारी चौहान उनपर नजर रखते थे, और उन्ही की वजह से उनमे छुपा कविता लिखने का गुण बाहर आया. और अब महादेवी जी और सुभद्रा जी खाली समय में साथ में कविताये लिखा करते थे. उनकी माता संस्कृत और हिंदी में निपुण थी और उन्हें उसका ज्ञान भी था. महादेवी अपने कवीयित्री बनने का पूरा श्रेय अपनी माता को देती थी, क्योकि उन्होंने उसे हमेशा अच्छी कविताये लिखने के लिए प्रेरित किया, और हमेशा हिंदी भाषा में उनकी रूचि बढाई.
जब दुसरे विद्यार्थी बाहर खेलते थे, तब मै (महादेवी) और सुभद्रा उस समय किसी पेड़ के निचे बैठते थे, और दोनों के रचनात्मक विचारो को बाहर लाते थे…वो (सुभद्रा) खरीबोली में अपनी कविताये लिखती थी, और फिर मैंने भी खड़ीबोली में लिखना शुरू किया… इस तरह हम दिन में एक से दो कविताये लिख लेते थे.
-महादेवी वर्मा, मेरे बचपन के दिन
महादेवी और सुभद्रा अपनी कविताओ को साप्ताहिक पत्रिका में प्रकाशन के लिए भी भेजते थे, जिनमे से उनकी कुछ कविताओ को प्रकाशित किया जाता था. दोनों कवियित्री कई कविताओ के समेंलन में भी उपस्थित रहती थी, जहा वे कई विख्यात कवियों से मिलती रहती, और दर्शको को उनकी कविताये भी सुनती. उनकी यह जुगलबंदी तब तक चलती रही जब तक सुभद्रा Crosthwaite से स्नातक नहीं होती.
महादेवी जी के कार्य :
महादेवीजी को छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माना जाता है, वो एक विख्यात चित्रकार भी थी. उन्होंने अपनी कविताओ के लिए कई सारे दृष्टांत बनाये जैसे हिंदी और यमा. उनके अन्य काम लघु कथा जैसे “गिल्लू”, जो उनके गिलहरी के साथ वाले अनुभवों के बारे में कहता है और “नीलकंठ” जो उनके मोर के साथ वाले अनुभव को दर्शाता है, जो सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन के 7 वी के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है. उन्होंने “गौरा” भी लिखी, जो उनके सच्चे जीवन पर आधारित है, इस कहानी में उन्होंने एक सुन्दर गाय के बारे में लिखा है. महादेवी वर्मा उनके बचपन के संस्मरण, “मेरे बचपन के दिन और गिल्लू” के लिए भी विख्यात है. जो सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन के 9 वी कक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किये गये है.
उनके द्वारा लिखी उनके पालतू पशुओ की कहानिया भी बहोत प्रसिद्द है.
महादेवी वर्मा जी की कविताये / Mahadevi Verma Poem In Hindi :
उनकी कई सारी कविताओ का प्रकाशन अलग-अलग शीर्षक के साथ किया गया, लेकिन वे सारी कविताये उनकी निचे दी हुई रचनाओ से ही ली गयी है. जिनमे शामिल है—
1) नीहार (1930)
2) रश्मि (1932)
3) नीरजा (1934)
4) संध्यागीत (1936)
5) दीपशिखा (1939)
6) अग्निरेखा (1990, उनकी मृत्यु के बाद प्रकाशित)
इन सारे संग्रहों की अतिरिक्त विशेषता यह थी की इनमे नयी “भूमिकाये” थी और आरंभिक नोट थी जो महादेवी जी ने अनोखी शैली में लिखी थी. उन्होंने कई सारी विख्यात कहानिया भी लिखी जैसे—
1) अतीत के चलचित्र
2) स्मृति की रेखाये
3) श्रंखला की कडिया
4) घीसा
महादेवी वर्मा जी के पुरस्कार / Mahadevi Verma Awards :
महादेवी वर्मा के रचनात्मक गन और तेज़ बुद्धि ने जल्द ही उन्हें हिंदी भाषा की दुनिया में एक उच्च पद पर पहुचाया. 1934 में, उनके द्वारा रचित “नीरजा” के लिए हिंदी साहित्य सम्मलेन ने उन्हें सेकसरिया पुरस्कार से सम्मानित किया. उनकी कविताओ का संग्रह (यमा, 1936) को जनिपथ पुरस्कार मिला, जो साहित्य क्र क्षेत्र में भारत का सर्वोच्च सम्मान है.
उन्हें अल्लाहाबाद यूनिवर्सिटी के भूतपूर्व छात्र एसोसिएशन, एनसीआर, गाज़ियाबाद की ओर से “गरिमा प्राप्त अतीत के व्यक्ति” की 42 सदस्यों की सूचि में शामिल किया गया.
भारत सरकार ने उन्हें पदम् भूषण प्रदान किया, वो पहली महिला है जिन्हें 1979 में साहित्य अकादमी अनुदान का पुरस्कार दिया गया. 1988 में, भारत सरकार ने उन्हें पदम् विभूषण प्रदान किया, जो भारत सरकार का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है.

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Friday, November 20, 2015

औरंगजेब

Aurangzeb
औरंगजेब – Aurangzeb History In Hindi
पूरा नाम   – अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर. Aurangzeb
जन्म        – 4 नवम्बर 1618.
जन्मस्थान  – दाहोद (गुजरात).
पिता        – शाहजहां.
माता        – मूमताज.
विवाह      – बेगम नवाब बाई, औरंगाबादी महल, उदयपुरी महल, झैनाबदी महल.

History of Aurangzeb

औरंगजेब शाहजहां के तीसरे बेटे थे. शाहजहां जब बूढ़े होकर बीमार हो गये तो औरंगजेब/ Aurangzeb  ने उन्हें कैद में डालकर अपने दोनों भाइयों को हटा दिया, इस तरह खुद गद्दी पर अधिकार कर लिया. शाहजहां की मौत कैदखाने में हुई. इस तरह वे हिन्दुस्तान के एकछत्र सम्राट बन गये.
औरंगजेब के पूर्वज अकबर आदी शासकों ने भारत को जो समृध्दि प्रदान की थी, औरंगजेब ने उसमें वृध्दि तो अवश्य की परन्तु अपने कट्टरपन तथा अपने पिता और भाइयों के प्रति दुर्व्यवहार के कारण उन्हें देश की जनता का विरोध भी मोल लेना पड़ा.
उन्होंने हिन्दुओं पर जजिया कर लगाया. वैसे नैतिक रूप से वे अच्छे चरित्र के व्यक्ति थे. वे टोपियां सीकर और कुरान की आयतें लिखकर अपना खर्चा चलाते थे. उन्होंने राज्य-विस्तार के लिए अनेक बड़ी-बड़ी लड़ाईयां लड़ीं.
इसमें संदेह नहीं कि औरंगजेब मुगल सल्तनत के महान सम्राट थे और उनका समय मुग़ल-साम्राज्य की समृध्दि की समृध्दि का स्वर्णिम युग था परन्तु औरंगजेब के कठमुल्लेपन और हिन्दुओं के प्रति विरोधी व्यवहार के फलस्वरूप वे मुगल-साम्राज्य के पतन का कारण भी बने.
राज्य को दृढ़ भी किया परन्तु उनके अन्यायपूर्ण कार्यो के कारण उनकी मृत्यु के 15-16 वर्ष बाद ही मुगल-साम्राज्य का सितारा डूब गया.
बाबर के खानदान के इस अंतिम मुगल सम्राट The last Mughal को अनेक कारणों से याद किया जाता है. बाबर जहां भारत में मुगल-साम्राज्य के संस्थापक थे, वहां औरंगजेब मुगल-साम्राज्य की समाप्ति का कारण बने.
औरंगज़ेब के निर्माण :-
1) औरंगज़ेब नेलाहौर की बादशाही मस्जिद बनवाई थी।
2) 1678 ई. में औरंगज़ेब ने अपनी पत्नी रबिया दुर्रानी की स्मृति में बीबी का मक़बरा  बनवाया।
3) औरंगज़ेब ने दिल्ली के लाल क़िले में मोती मस्जिद बनवाई थी।

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Akbar History

Akbar images
पूरा नाम   – अबुल-फतह जलाल उद्दीन मुहम्मद अकबर
जन्म   –  15 अक्तुबर, 1542.
जन्मस्थान   –   अमरकोट.
पिता Father of Akbar    हुमांयू
माता   –   नवाब हमीदा बानो बेगम साहिबा
शिक्षा   –   अल्पशिक्षित होने के बावजूद सैन्य विद्या में अत्यंत प्रवीण थे.
विवाह Wives of Akbar   –   रुकैया बेगम सहिबा, सलीमा सुल्तान बेगम सहिबा, मारियाम उज़-ज़मानि बेगम सहिबा, जोधाबाई राजपूत
संतान Son of Akbar  – जहाँगीर,

Akbar History In Hindi

जलाल उद्दीन अकबर / Jalaluddin Muhammad Akbar, जो साधारणतः अकबर और फिर बाद में अकबर-एक महान के नाम से जाने जाते थे, वे 1556 से उनकी मृत्यु तक मुघल साम्राज्य के शासक थे. वे भारत के तीसरे और मुघल के पहले सम्राट थे. अकबर अपने पिता हुमायु के बेटे थे, जिन्होंने पहले से ही मुघल साम्राज्य का भारत में विस्तार कर रखा था.

अकबर  प्रारंभिक जीवन – History of King Akbar

1539-40 में चौसा और कन्नौज में होने वाले शेर शाह सूरी से युद्ध में पराजित होने के बाद मुघल सम्राट हुमायु पश्चिम की और गये जहा सिंध में उनकी मुलाकात 14 साल की हमीदा बानू बेगम जो शैख़ अली अकबर की बेटी थी, उन्होंने उनसे शादी कर ली और अगले साल ही जलाल उद्दीन मुहम्मद का जन्म 15 अक्टूबर 1542 को राजपूत घराने में सिंध के उमरकोट में हुआ (जो अभी पकिस्तान में है) जहा उनके माता-पिता को वहा के स्थानिक हिंदु राना प्रसाद ने आश्रय दिया.
और हुमायु के लम्बे समय के वनवास के बाद, अकबर अपने पुरे परिवार के साथ काबुल स्थापित हुए. जहा उनके चाचा कामरान मिर्ज़ा और अस्करी मिर्ज़ा रहते थे. उन्होंने अपनी पुरानी जवानी शिकार करने में, युद्ध कला सिखने में, लड़ने में, भागने में व्यतीत की जिसने उसे एक शक्तिशाली, निडर और बहादुर योद्धा बनाया. लेकिन अपने पुरे जीवन में उन्होंने कभी लिखना या पढना नहीं सिखा था. ऐसा कहा जाता है की जब भी उन्हें कुछ पढने की जरुरत होती तो वे अपने साथ किसी को रखते थे जिसे पढना लिखना आता हो. 1551 के नवम्बर में अकबर ने काबुल की रुकैया से शादी कर ली. महारानी रुकैया उनके ही चाचा हिंदल मिर्ज़ा की बेटी थी. जो उनकी पहली और मुख्य पत्नी थी. उनकी यह पहली शादी अकबर के पिता और रुकैया के चाचा ने रचाई थी. और हिंदल मिर्ज़ा की मृत्यु के बाद हुमायु ने उनकी जगह ले ली.
शेर शाह सूरी से पहली बार पराजित होने के बाद, हुमायु में दिल्ली को 1555 में पुनर्स्थापित किया और वहा उन्होंने एक विशाल सेना का निर्माण किया. और इसके कुछ ही महीनो बाद हुमायु की मृत्यु हो गयी. अकबर को एक सफल शक्तिशाली बादशाह बनाने के लिए अकबर के रक्षक ने उनसे उनके पिता की मृत्यु की बात छुपाई. और अंत में 14 फेब्रुअरी 1556 को सिकंदर शाह को पराजित कर अकबर युद्ध में सफल हुए और वही से उन्होंने मुघल साम्राज्य का विस्तार शुरू किया. कलानौर, पंजाब में बैरम खान द्वारा 13 साल के अकबर को वहा की राजगद्दी सौपी गयी, ताकि वे अपने लिए एक नया विशाल साम्राज्य स्थापित कर सके. जहा उन्हें “शहंशाह” का नाम दिया गया. बैरम खान ने हमेशा अकबर का साथ दिया.

Jalaluddin Muhammad Akbar :

अकबर एक बहादुर और शक्तिशाली शासक थे उन्होंने गोदावरी नदी के आस-पास के सारे क्षेत्रो को हथिया लिया था और उन्हें भी मुघल साम्राज्य में शामिल कर लिया था. उनके अनंत सैन्यबल, अपार शक्ति और आर्थिक प्रबलता के आधार पर वे धीरे-धीरे भारत के कई राज्यों पर राज करते चले जा रहे थे. अकबर अपने साम्राज्य को सबसे विशाल और सुखी साम्राज्य बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने कई प्रकार की निति अपनाई जिस से उनके राज्य की प्रजा ख़ुशी से रह सके. उनका साम्राज्य विशाल होने के कारण उनमे से कुछ हिंदु धर्म के भी थे, उनके हितो के लिए उसने हिंदु सम्राटो की निति को भी अपनाया और मुघल साम्राज्य में लागू किया. वे विविध धर्मो के बिच हो रहे भेदभाव को दूर करना चाहते थे. उनके इस नम्र स्वाभाव के कारण उन्हें लोग एक श्रेष्ट राजा मानते थे. और ख़ुशी-ख़ुशी उनके साम्राज्य में रहते थे. हिन्दुओं के प्रति अपनी धार्मिक सहिष्णुता का परिचय देते हुए उन्होंने उन पर लगा ‘जजिया’ नामक कर हटा दिया.अकबर में अपने जीवन में जो सबसे महान कार्य करने का प्रयास किया, वह था ‘दिन – ए – इलाही’ नामक धर्म की स्थापना. इसे उन्होंने सर्वधर्म के रूप में स्थापित करने की चेष्टा की थी. 1575 में उन्होंने एक ऐसे इबादतखाने (प्रार्थनाघर) की स्थापना की थी, जो सभी धर्मावलम्बियों के लिए खुला था, वो अन्य धर्मों के प्रमुख से धर्म चर्चायें भी किया करते थे.
साहित्य एवं कला को उन्होंने बहुत अधिक प्रोत्साहन दिया. अनेक ग्रंथो, चित्रों एवं भवनों का निर्माण उनके शासनकाल में ही हुआ था. उनके दरबार में विभिन्न विषयों के लिए विशेषज्ञ नौ विद्वान् थे, जिन्हें ‘नवरत्न’ कहा जाता था.
अकबर को भारत के उदार शासकों में गिना जाता है. संपूर्ण मध्यकालीन इतिहास में वो एक मात्र ऐसे मुस्लीम शासक हुए है जिन्होंने हिन्दू मुस्लीम एकता के महत्त्व को समझकर एक अखण्ड भारत निर्माण करने की चेष्टा की.
भारत के प्रसिद्ध शासकों में मुग़ल सम्राट अकबर अग्रगण्य है,वो एकमात्र ऐसे मुग़ल शासक सम्राट थे, जिन्होंने हिंदू बहुसंख्यकों के प्रति कुछ उदारता का परिचय दिया,
धीरे-धीरे भारत में मुघल साम्राज्य का विस्तार होने लगा और स्थिर आर्थिक परिस्थिती राज्य में आ रही थी. अकबर कला और संस्कृति के बहोत बड़े दीवाने थे इसलिए उन्होंने अपने शासन काल में इन दोनों के विकास पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया. उन्हें साहित्य का भी बहोत शौक था इसलिए उन्होंने 2400 खंड लिखवाए और उन्हें ग्रंथालय में प्रकाशित भी किया. उनकें साम्राज्य में कई भाषा के सैनिक थे जैसे की हिंदु, संस्कृत, ग्रीक, पर्शियन इत्यादि. अकबर ने हिंदु-मुस्लिम सम्प्रदायों के बिच की दुरिया कम करने के लिए दिन-ए-इलाही नामक धर्म की स्थापना की. उनका दरबार सबके लिए हमेशा से ही खुला रहता था. अकबर ने अनेक फारसी संस्कृति से जुड़े चित्रों को अपनी दीवारों पर बनवाया. अपने आरंभिक शासन काल में अकबर की हिन्दुओ के प्रति सहिष्णुता नहीं थी, किन्तु समय के साथ-साथ उसने अपने आप को बदला और हिन्दुओ सहित अन्य धर्मो में भी अपनी रूचि दिखाई. अकबर ने हिंदु राजपूत राजकुमारी से वैवाहिक भी किया. उनकी एक राणी जोधाबाई राजपूत थी. अकबर के दरबार में अनेक हिंदु दरबारी, सैन्य अधिकारी व सामंत थे. उसने धार्मिक चर्चाओ व वाद-विवाद कार्यक्रमों की अनोखी श्रुंखला आरम्भ की थी, जिसमे मुस्लिम आलिम लोगो की जैन, सीख, हिंदु, नास्तिक, पुर्तगाली एवम् कैथोलिक इसाई धर्मशास्त्रियो से चर्चा हुआ करती थी.
मुघल साम्राज्य में निच्छित ही भारतीय इतिहास को प्रभावित किया था. उनकी ताकत और आर्थिक स्थिति सतत तेज़ी से बढती जा रही थी. अकबर ने अपने आर्थिक बल से विश्व की एक सबसे शक्तिशाली सेना बना रखी थी, जिसे किसी के लिए भी पराजित करना असंभव सा था. अकबर ने जो लोग मुस्लिम नहीं थे उनसे कर वसूल करना भी छोड़ दिया और वे ऐसा करने वाले पहले सम्राट थे, और साथ ही जो मुस्लिम नहीं है उनका भरोसा जितने वाले वे पहले सम्राट थे. अकबर के बाद, सफलता से उनका साम्राज्य उनका बेटा जहागीर चला रहा था.
मृत्यु – Akbar Death :
3 अक्टूबर 1605 अकबर को पेचिश की बीमारी हुई, जिस से वे कभी ठीक नहीं हो पाए. उनकी मृत्यु 27 अक्टूबर 1605 को हुई, उसके बाद आगरा में उनकी समाधी बनाई गयी.
King Akbar :
अकबर मुघल साम्राज्य के महान और बहादुर सम्राटो में से एक थे. उन्होंने कभी मुस्लिम और हिंदु इन दो धर्मो में भेदभाव नहीं किया. और अपने साम्राज्य में सभी को एक जैसा समझकर सभी को समान सुविधाए प्रदान की. इतिहास में झाककर देखा जाए तो हमें जोधा-अकबर की प्रेम कहानी विश्व प्रसिद्द दिखाई देती है. जलाल उद्दीन मुहम्मद अकबर अपनी प्रजा के लिए किसी भगवान् से कम नहीं थे. उनकी प्रजा उनसे बहोत प्यार करती थी. और वे भी सदैव अपनी प्रजा को हो रहे तकलीफों से वाकिफ होकर उन्हें जल्द से जल्द दूर करने का प्रयास करते. इसीलिए इतिहास में शहंशाह जलाल उद्दीन मुहम्मद अकबर को एक बहादुर, बुद्धिमान और शक्तिशाली शहंशाह माने जाते है.
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Samrat Ashoka History







पूरा नाम     – अशोक बिंदुसार मौर्य.
जन्म          – ईसा पूर्व 294.
जन्मस्थान  – पाटलीपुत्र.
पिता           – राजा बिंदुसार.
माता           – धर्मा / शुभद्रांगी.
विवाह         – देवी, कारुवाकी, असंधीमित्रा, पदमावती, तिष्क रक्षिता.
Samrat Ashoka History 
अशोक मौर्य जो साधारणतः अशोका और अशोका- एक महान ( Ashoka The Great ) के नाम से जाने जाते है. वे मौर्य राजवंश के एक भारतीय सम्राट थे जिन्होंने जिनका शासन भारतीय उपमहाद्वीप पर राजकाल इसवी सन 273-232 तक राज किया. वे भारत के महान शक्तिशाली समृद्ध सम्राटो में से एक थे. उस समय मौर्य राज्य उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बंगाल से पश्चिम में अफगानिस्तान तक पहोच गया था. उनके साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र(मगध, आज का बिहार) और साथ ही उपराजधानी तक्सिला और उज्जैन भी थी.
पाटलिपुत्र के राजा बिंदुसार की मृत्यु के बाद राजगद्दी अशोक के बड़े भाई शुशिम को मिलने वाली थी, लेकिन मंत्रियों ने अशोक को ज्यादा सक्षम पाया, इसलिए उन्होंने अशोक को सत्तासीन होने में मदद की.
उस समय पाटलिपुत्र में अराजकता और मारकाट का वातावरण व्याप्त था. अशोक ने अपने को कुशल प्रशासक सिध्द करते हुए तीन साल के भीतर ही राज्य में शांति स्थापित की और उसके बाद ही ईसा पूर्व 273 में औपचारिक रूप से राजगद्दी संभाली. उसके शासनकाल में देश ने विज्ञान तकनीक के साथसाथ चिकित्सा शास्त्र में काफी तरक्की की. उसने धर्म पर इतना जोर दिया कि प्रजा इमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलने लगी. चोरी और लूटपाट की घटानाएं बिलकुल ही बंद हो गईं.
अशोक घोर मानवतावादी था. वह रातदिन जनता की भलाई के काम ही किया करता था. उसे विशाल साम्राज्य के किसी भी हिस्से में होने वाली घटना की जानकारी रहती थी. धर्म के प्रति कितनी आस्था थी, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि वह बिना एक हजार ब्राम्हणों को भोजन कराए स्वयं कुछ नहीं खता था. कलिंग युध्द अशोक के जीवन का पहला और आखरी युध्द था, जिसके उसने जीवन को ही बदल डाला.
अशोक इस छोटेसे किंतु बहुत ही समृध्द राज्य को अपने साम्राज्य में मिलाना चाहता था, लेकिन स्वाभिमानी और बहादुर कलिंगवासी अपनी स्वतंत्रता बनाए रखना चाहते थे. इसवी सन 260 के आस-पास अंततः अशोक ने कलिंग पर चढ़ाई की और घमासान युध्द शुरु हुआ. अशोका ने कलिंगा के साथ एक भयंकर युद्ध किया. जिसमे उसने कलिंगा को परास्त किया जो इस से पहले किसी सम्राट ने नहीं किया था और ना ही कर पाया था. उस समय मौर्य साम्राज्य तब तक का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य माना जाता था. सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य से कुशल और बेहतर प्रशासक तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए जाना जाता था. अशोका से हुए कलिंगा-अशोका युद्ध में 100000 से भी ज्यादा मृत्यु हुई और 150000 से भी ज्यादा घायल हुए. इस युध्द में हुए भारी रक्तपात ने उसे हिलाकर रख दिया. उसने सोचा कि यह सब लालच का दुष्परिणाम है और जीवन में फिर कभी युध्द करने का प्रण लिया. उसने बौध्द धर्म अपना लिया और अहिंसा का पुजारी हो गया. उसने देशभर में बौध्द धर्म के प्रचार के लिए स्तंभों और स्तूपों का निर्माण कराया. विदेशों में बौध्द धर्म के विस्तार के लिए उसने भिक्षुओं की तोलियां भेजींबुद्ध का प्रचार करने हेतु उन्होंने अपने रज्य में जगह-जगह पर भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमाये स्थापित की. और बुद्ध धर्म का विकास करते चले गये.
बौध्द धर्म को अशोक ने ही विश्व धर्म के रूप में मान्यता दिलाई. विदेशों में बौध्द धर्म के प्रचार के लिए अशोक ने अपने पुत्र और पुत्री तक को भिक्षु-भिक्षुणी के रूप में भारत से बाहर भेजा. सार्वजानिक कल्याण के लिये उसने जो कार्य किये वे तो इतिहास में अमर ही हो गये हैं. नैतिकता, उदारता एवं भाईचारे का संदेश देने वाले अशोक ने कई अनुपम भवनों तथा देश के कोने-कोने में स्तंभों एवं शिलालेखों का निर्माण भी कराया जिन पर बौध्द धर्म के संदेश अंकित थे. भारत का राष्ट्रीय चिह्नअशोक चक्रतथा शेरों कीत्रिमूर्तिभी अशोक महान की ही दें है. ये कृतियां अशोक निर्मित स्तंभों और स्तूपों पर अंकित हैं. ‘त्रिमूर्तिसारनाथ (वाराणसी) के बौध्द स्तूप के स्तंभों पर निर्मित शिलामुर्तियों की प्रतिकृति है.
किताब आउटलाइन ऑफ़ हिस्ट्री में अशोका में बारे में यह लिखा है की, “इतिहास में अशोका को हजारो नामो से इस महान सम्राट को जानता है, जहा जगह-जगह पर उनकी वीरता के किस्से है, उनकी गाथा पुरे इतिहास में प्रचलित है, वे एक सर्व प्रिय, न्यायप्रिय, दयालु और शक्तिशाली सम्राट थे. वे एक आकाश में चमकने वाले तारे की तरह है जो अकेला ही क्यू ना हो लेकिन चमकता जरुर है, और सतत चमकते ही जाता है, भारतीय इतिहास का यही चमकता तारा सम्राट अशोका है. अशोका का साम्राज्य 2 री सदी तक चलता रहा, कभी अशोकवदना के नाम से तो कभी श्रीलंका के शब्द महावास्मा (महान सम्राट) के नाम से. वे सदैव लोगो के दिलो दिमाग में अपनी जगह बनाते रहे. और आज के आधुनिक भारत ने भी उनके 4 शेरो के चिन्ह को क़ानूनी तौर से अपनाया है. जिसे हम अशोक चिन्ह के नाम से भी जानते है.
अशोक भारतीय इतिहास का एक ऐसा चरित्र है, जिसकी तुलना विश्व में किसी से नहीं की जा सकती. एक विजेता, दार्शनिक एवं प्रजापालक शासक के रूप में उसका नाम अमर रहेगा. उसने जो त्याग एवं कार्य किये वैसा अन्य कोई नहीं कर सका.
सम्राट अशोका एक आदर्श सम्राट थे. इतिहास में अगर हम देखे तो उनके जैसा निडर सम्राट ना कभी हुआ ना ही कभी होंगा. उनके रहते मौर्य साम्राज्य पर कभी कोई विपत्ति नहीं आई.
Samrat Ashoka Death – मृत्यु  –   सम्राट अशोक ने लगभग 40 वर्षों तक शासन किया. . सा पूर्व 232 के आसपास उनकी मृत्यु हुयीइस महान सम्राट के मृत्यु के बाद मौर्य राजवंश 60 वर्षों के आसपास तक चला.
विश्व इतिहास में अशोक महान एक अतुलनीय चरित्र है. उस जैसा ऐतिहासिक पात्र अन्यत्र दुर्लभ है. भारतीय इतिहास के प्रकाशवान तारे के रूप में वह सदैव जगमगाता रहेगा.

 Thanks...

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